Wednesday, September 28, 2022
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विश्व प्रसिद्ध विषाणु वैज्ञानिक डॉ0 नंदी द्वारा केन्द्रीय विश्वविद्यालय में व्याख्यान

विश्व प्रसिद्ध विषाणु विज्ञानी डॉ0 श्याम सुंदर नंदी, उप निदेशक, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के शाहपुर परिसर में सेंटर फॉर कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी एंड बायोइंफॉरमैटिक्स में अपने शोध पर व्याख्यान के दौरान हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के सदस्यों के साथ।

विश्व प्रसिद्ध विषाणु वैज्ञानिक डॉ0 नंदी द्वारा केन्द्रीय विश्वविद्यालय में व्याख्यान

  • समस्याओं के प्रभावी उन्मूलन में सहयोगी होना चाहिए शोध।
  • डॉ0 नंदी उस शोध दल के प्रमुख सदस्य हैं जिसने दुनिया का पहला और सबसे प्रभावी एंटी-कोविड वैक्सीन ’’कोवैक्सिन’’ (Covaxine) विकसित किया है।

इंडिया न्यूज, धर्मशाला (Dharamshala Himachal Pradesh)

विश्व प्रसिद्ध विषाणु विज्ञानी डॉ0 श्याम सुंदर नंदी, उप निदेशक, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) Dr. Shyam Sundar Nandi, Deputy Director, National Institute of Virology (Indian Council of Medical Research) ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के शाहपुर परिसर (Centre University campus Shahpur) में सेंटर फॉर कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी एंड बायोइंफॉरमैटिक्स में अपने शोध पर व्याख्यान दिया। डॉ0 नंदी की शोध टीम ने एक लागत प्रभावी व सुगम सुलभ कोविड जांच किट विकसित की है।

डॉ0 नंदी उस शोध दल के प्रमुख सदस्य हैं जिसने दुनिया का पहला और सबसे प्रभावी एंटी-कोविड वैक्सीन ’’कोवैक्सिन’’ विकसित किया है।

डॉ0 नंदी उस शोध दल के प्रमुख सदस्य हैं जिसने दुनिया का पहला और सबसे प्रभावी एंटी-कोविड वैक्सीन ’’कोवैक्सिन’’ (Covaxine) विकसित किया है। उन्होंने ‘सिलिकोसिस’ (Silicosis) नामक बीमारी का पूर्वानुमान लगाने के लिए दुनिया की पहली रैपिड टेस्ट किट भी विकसित की थी जो लगभग 10 साल पहले इस बीमारी का पता लगा सकती थी। डॉ0 नंदी का शोध ’’मेक इन इंडिया’’ (Make In India) अभियान का एक जीवंत उदाहरण है जिसने जमीनी स्तर पर जनता की मदद की है।

डा0 नंदी ने तीन तात्कालिक विषयों पर तीन व्याख्यान दिए।

व्याख्यान श्रृंखला के आयोजन सचिव डॉ0 दिनेश लखनपाल ने आमंत्रित वक्ता का परिचय उपस्थित श्रोताओं के समक्ष रखा जिसके उपरांत डॉ0 नंदी ने तीन तात्कालिक विषयों जिनमें वैक्सीनेशन टीके के विकास में वर्तमान प्रणालियाँ, सस्ते जाँच किट निर्माण के तरीकों और व्यावसायिक रोगों का पता लगाने/रोकथाम पर तीन व्याख्यान दिए।

 

डा0 नंदी ने आचार्यों, युवा शोधकर्ताओं व छात्रों को विज्ञान अनुसंधान में उतरने की दी प्रेरणा।

उन्होंने जैविक विज्ञान स्कूल के विभिन्न आचार्यों, युवा शोधकर्ताओं व छात्रों को समाधान-प्रेरित मानसिकता के साथ विज्ञान अनुसंधान में उतरने की प्रेरणा दी। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को कड़ी मेहनत के साथ साथ स्मार्ट तरीके को भी अपनी कार्यप्रणाली में जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारे शोध के परिणामस्वरूप आम जनमानस को लाभ पहुंचना चाहिए व हमारा शोध हमेशा समस्याओं के लागत प्रभावी उन्मूलन में सहयोगी होना चाहिए।

डॉ. नंदी ने जैविक विज्ञान स्कूल के साथ वैज्ञानिक (अनुसंधान और अकादमिक) सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रसन्नता व्यक्त की।

डॉ. नंदी ने जैविक विज्ञान स्कूल के साथ वैज्ञानिक (अनुसंधान और अकादमिक) सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रसन्नता व्यक्त की। सीसीबी के निदेशक डॉ0 महेश कुलहरिया ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया और प्रख्यात शोधकर्ता डॉ0 श्याम सुन्दर नंदी जी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकाल कर युवा प्रतिभाओं के साथ शोध की विभिन्न संभावनाओं पर विचार साँझा किये। विश्वविद्यालय के जैविक विज्ञान स्कूल के विभिन्न सदस्यों डॉ0 विक्रम सिंह, डॉ0 संदीप स्वर्गम, डॉ0 राकेश ठाकुर, डॉ0 दिव्या नायर, डॉ0 मुनीश शर्मा, डॉ0 जितेंद्र कुमार और लगभग सौ शोधार्थियों और परास्नातक डिग्री छात्रों ने इस कार्यक्रम में सम्भागिता की।
विश्व प्रसिद्ध विषाणु वैज्ञानिक डॉ0 नंदी द्वारा केन्द्रीय विश्वविद्यालय में व्याख्यान

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