Saturday, February 4, 2023
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7 वर्ष की अवोध बच्ची से घिनौनी हरकत पर फांसी की सजा को उम्र कैद बदलने से दुःखी हूॅं-शांता कुमार

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7 वर्ष की अवोध बच्ची से घिनौनी हरकत पर फांसी की सजा को उम्र कैद बदलने से दुःखी हूॅं-शांता कुमार

  • बलात्कार करने पर हो फांसी की सजा

इंडिया न्यूज, पालमपुर (Palampur-Himachal Pradesh)

प्रदेश के जिला सोलन में एक 7 वर्षिय अवोध बच्ची के साथ घिनौना अपराध हुआ, माननीय जिला न्यायलय से फांसी की सजा मिली परंतु माननीय उच्च न्यायालय (hon’ble high court) द्वारा फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया, जिसको जानकार मैं दुःखी होने से साथ आहत भी हो गया, ये शब्द हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार (Former Chief Minister and former Union Minister Shanta Kumar) ने जारी प्रेस विज्ञप्ति (press statement) में कहे।

उन्होने कहा कि सोलन में सात वर्ष की एक मासूम बच्ची का आकाश ने अपहरण किया और उसके बाद उसका बलात्कार किया और फिर बड़ी बेे-रेहमी से उसका गला घोंट कर हत्या कर दी, इतना ही नही दरिन्दगी की सारी हदें पार करते हुए उस सात साल की मासूम बच्ची के प्राईवेट पार्ट में लकड़ी का टुकड़ा भी डाल दिया।

सोलन में माननीय न्यायालय ने इसे घोर अपराध कहा और फांसी की सजा सुनाई थी। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध “रेयर ऑफ रेयरेस्ट” का मामला नही बनता। मुझे पढ़ कर बहुत हैरानी हुई।

उन्होंने कहा कि पहला अपराध यह है कि सात साल की मासूम बेटी का अपहरण किया, दूसरा अपराध उससे बलात्कार किया, तीसरा अपराध उसका बे-रेहमी से गला घोंट कर हत्या कर दी और चौथा अपराध उसके प्राईवेट पार्ट में लकड़ी का टुकड़ा डाला।

उस दरिंदें ने और कौन सा अपराध नही किया, जिसके कारण उसके अपराध को ’’रेयर ऑफ रेयरेस्ट’’ कहा जाए, और कुछ करने के लिए बचा ही नही था, इसलिए सोलन की माननीय अदालत ने उसे फांसी की सजा दी थी।

शांता कुमार ने कहा कि मैं न्यायपालिका का पूरा सम्मान करता हॅू परन्तु माननीय उच्च न्यायालय का यह निर्णय मुझे बिलकुल समझ नही आया।

उन्होंने कहा कि देश में बेटियों के साथ लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। बलात्कार के अपराधों में प्रतिवर्श बढ़ौतरी हो रही हैं। दिल्ली में भयंकर निर्भया काण्ड के बाद पूरा देश हिल गया था, देश की जवानी सड़कों पर आ गई थी इसके बाद सरकार ने वर्मा कमेटी बिठाई।

लम्बे सोच विचार के बाद कानून में संशेधन किया गया, परन्तु देश का दुर्भाग्य है कि उसके बाद भी कोई सुधार नही हुआ। बल्कि हुआ यह है कि अब अपराधी बलात्कार करने के बाद हत्या भी कर देता है ताकि कोई प्रमाण ही नही बचे।

शान्ता कुमार ने कहा हिमाचल में भी कुछ वर्ष पहले गुडिया काण्ड (gudyia rape case) हुआ। हिमाचल के इतिहास में पहली बार गुस्से में जनता ने पुलिस थाने (police station burnt)  को जलाया।

हिमाचल पुलिस के सात उच्च अधिकारियों को जेल (seven senior police officers in jail) में डाला गया और अन्त में एक चरानी को बलि का बकरा बनाया गया। गुडिया के दोषी अब भी खुले आम घूम रहे हैं।

उन्होंने कहा 2002 के गुजरात दंगों में बिलकिस बानो के साथ भयंकर अपराध हुआ। उसके परिवार के आठ लोगों की हत्या हुई। उसकी गोद में तीन साल की बेटी को उसी के सामने पत्थर पर पटक कर मार दिया गया।

21 साल की बिलकिस बानो (bilkis bano) पांच मास की गर्भवती के साथ गैंगरेप हुआ। अपराध सिद्ध हो गया, परन्तु दोषियों को केवल उम्र कैद हुई। उन्हें जेल में बड़ी सुविधाएं मिली।

14 साल में वे तीन साल पैरोल पर घर आते रहें, रैलियां करते रहे। चुनाव से पहले उन्हें विशेष रियायत देकर जेल से मुक्त कर दिया गया। पीड़िता बिलकिस बानो माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी गई, परन्तु उसे वहां भी न्याय नही मिला।

शान्ता कुमार ने कहा सीता सवित्री के देश भारत में बेटियों के साथ बढ़ते इन अपराधों का सबसे बड़ा कारण यह है कि सब अपराधी पकड़े नहीं जाते, जो पकड़े जाते है उन्हें समय पर सजा नही होती – सजा भी बहुत कम होती है। इस कारण डर नही है।

उन्होंने कहा भारत में कभी भरे दरबार में द्रौपदी का केवल चीर हरण हुआ था और कुछ नहीं हुआ। उस पर भारत के इतिहास का भयंकर युद्ध महाभारत हुआ। हजारों लोग मारे गये।

आज इस देश में नन्हीं द्रौपदियों का बलात्कार भी होता है, बे-रेहमी से हत्या भी होती है और पशुओं से भी बतहर दरिंगी होती है, परन्तु सरकार का व सजा का कही कोई डर नही है।

शान्ता कुमार ने कहा दुनिया के 190 देशें में भारत में सबसे अधिक बलात्कार होते हैं। मेरे विचार से इनकी जिम्मेवारी समाज और सरकार पर है। इस विषय पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, कानून बदलना चाहिए। बलात्कार में केवल और केवल फांसी की सजा दी जानी जाए।

विश्व में कुछ ऐसे देश है जहां इस प्रकार के अपराधों की खुलेआम कठोर सजा दी जाती है, जिस के कारण उन देशें में अपराध बहुत कम होते है। कठोर सजा की कमी ही भारत में इन अपराधों के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।

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