Sunday, November 27, 2022
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कृषि विश्वविद्यालय की तीन शोधकर्ता छात्राएं ताइवान रवाना

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कृषि विश्वविद्यालय की तीन शोधकर्ता छात्राएं ताइवान रवाना

  • एक माह करेगी ताइवान में शोध

इंडिया न्यूज, पालमपुर (Palampur-Himachal Pradesh)

चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (Chaudhary Sarwan Kumar Himachal Pradesh Agricultural University) की तीन शोधकर्ता छात्राएं एक माह के लिए ताइवान (taiwan) के लिए रवाना हुई। पीएचडी शोधकर्ता पायल (PhD researcher Payal), सृष्टि (shrithi) और अलीशा ठाकुर (alisha thakur) ताइवान में शोध (research) पर आधारित एक माह का प्रशिक्षण (training) हासिल करेगी। ये जानकारी कुलपति प्रो0 एच0 के0 चौधरी (Vice Chancellor Prof. H.K.Chowdhary) ने दी।

शोधार्थी आणविक सब्जी प्रजनन से संबंधित अनुसंधान विषयों के नए क्षेत्रों से परिचित होंगे

उन्होने बताया कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना ने इन शोधार्थियों को वर्ल्ड वेजिटेबल सेंटर, ताइवान (World Vegetable Center, Taiwan) में प्रशिक्षण के लिए प्रायोजित किया है। वनस्पति विज्ञान (botany) और पुष्प कृषि विभाग (Floriculture Department) के ये शोधार्थी आणविक सब्जी प्रजनन (molecular vegetable breeding) से संबंधित अनुसंधान विषयों के नए क्षेत्रों से परिचित होंगे और दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक जीन बैंक (public gene bank) से भी परिचित होंगे।

डॉ0 रोलैंड शैफ्लेइटनर, प्रमुख, मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स-कम-फ्लैगशिप प्रोग्राम लीडर के मार्गदर्शन में काम करेंगी।

उन्होने बताया कि वे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2022 तक डॉ0 रोलैंड शैफ्लेइटनर, प्रमुख, मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स-कम-फ्लैगशिप प्रोग्राम लीडर, वेजिटेबल डायवर्सिटी एंड इम्प्रूवमेंट (Dr. Roland Scheffleitner, Head, Molecular Genetics-cum-Flagship Program Leader, Vegetable Diversity and Improvement) के मार्गदर्शन में काम करेंगी। उनके जाने की पूर्व संध्या पर प्रो0 चौधरी ने इन पीएचडी. शोधार्थियों को सलाह दी कि वे अनुसंधान कार्य को अपने पीएच.डी. को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं का अनुभव करें।

विभागाध्यक्ष डॉ0 डी0 आर0 चौधरी, विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ0 रणबीर सिंह राणा और छात्रों के सलाहकार डॉ0 प्रवीण शर्मा ने बताया कि अनुसंधान विद्वानों का चयन आणविक आनुवंशिकी पर उनकी शोध समस्याओं के आधार पर किया गया है।

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